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सरकारी शिक्षा की बदहाल स्थिति : जिम्मेदार कौन?

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( आजकल हम देखते हैं  कि सोशल मीडिया पर अधिकांश समूहों में, समाचार पत्रों की सुर्खियों में,बड़ी-बड़ी सरकारी बैठकों में , गली मौहल्ले के नुक्कड़ों और चाय की दुकानों में  सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर विशेष चिंता प्रदर्शित की जा रही है । सरकारी शिक्षा की वर्तमान स्थिति की पड़ताल करती, सोचने पर मजबूर कर देने वाली   तनुज पंत 'अनंत ' की सटीक टिप्पणी..........)    ( तनुज पंत  ' अनंत '   एक बैंक अधिकारी हैं।   लेखन , पठन-पाठन में रूचि व    साहित्य  के क्षेत्र में प्रभावी दखल रखते हैं.) सुप्रभात मित्रों, जब कभी कापी-पेस्ट और फोटो फॉरवर्ड के इस व्हाटसेपिया बीहड़ में इस प्रकार की गंभीर चर्चा पढ़ने को मिलती है तो लगता है कि ग्रुप बनाने का प्रयोजन सफल हुआ। हमारे यहां सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था वो पतंग है जिसकी डोर निरंतर उलझती जा रही है। विकल्प यह भी है कि डोर काट कर पतंग आजाद कर दी जाये और यह भी, कि डोर सुलझायी जाये। पतंग उड़ायी भी पतंगबाज ने और डोर उलझायी भी पतंगबाज ने। इसमें पतंग का क्या दोष है? अब डोर सुलझाने के झंझट में ना ...

सरकारी शिक्षा की बदहाल स्थिति : जिम्मेदार कौन?

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( आजकल हम देखते हैं  कि सोशल मीडिया पर अधिकांश समूहों में, समाचार पत्रों की सुर्खियों में,बड़ी-बड़ी सरकारी बैठकों में , गली मौहल्ले के नुक्कड़ों और चाय की दुकानों में  सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर विशेष चिंता प्रदर्शित की जा रही है । सरकारी शिक्षा की वर्तमान स्थिति की पड़ताल करती, सोचने पर मजबूर कर देने वाली   तनुज पंत 'अनंत ' की सटीक टिप्पणी..........)    ( तनुज पंत  ' अनंत '   एक बैंक अधिकारी हैं।   लेखन , पठन-पाठन में रूचि व    साहित्य  के क्षेत्र में प्रभावी दखल रखते हैं.) सुप्रभात मित्रों, जब कभी कापी-पेस्ट और फोटो फॉरवर्ड के इस व्हाटसेपिया बीहड़ में इस प्रकार की गंभीर चर्चा पढ़ने को मिलती है तो लगता है कि ग्रुप बनाने का प्रयोजन सफल हुआ। हमारे यहां सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था वो पतंग है जिसकी डोर निरंतर उलझती जा रही है। विकल्प यह भी है कि डोर काट कर पतंग आजाद कर दी जाये और यह भी, कि डोर सुलझायी जाये। पतंग उड़ायी भी पतंगबाज ने और डोर उलझायी भी पतंगबाज ने। इसमें पतंग का क्या दोष है? अब डोर सुलझा...

सरकारी शिक्षा की बदहाल स्थिति : जिम्मेदार कौन?

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( आजकल हम देखते हैं  कि सोशल मीडिया पर अधिकांश समूहों में, समाचार पत्रों की सुर्खियों में,बड़ी-बड़ी सरकारी बैठकों में , गली मौहल्ले के नुक्कड़ों और चाय की दुकानों में  सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर विशेष चिंता प्रदर्शित की जा रही है । सरकारी शिक्षा की वर्तमान स्थिति की पड़ताल करती, सोचने पर मजबूर कर देने वाली   तनुज पंत 'अनंत ' की सटीक टिप्पणी..........)    ( तनुज पंत  ' अनंत '   एक बैंक अधिकारी हैं।   लेखन , पठन-पाठन में रूचि व    साहित्य  के क्षेत्र में प्रभावी दखल रखते हैं.) सुप्रभात मित्रों, जब कभी कापी-पेस्ट और फोटो फॉरवर्ड के इस व्हाटसेपिया बीहड़ में इस प्रकार की गंभीर चर्चा पढ़ने को मिलती है तो लगता है कि ग्रुप बनाने का प्रयोजन सफल हुआ। हमारे यहां सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था वो पतंग है जिसकी डोर निरंतर उलझती जा रही है। विकल्प यह भी है कि डोर काट कर पतंग आजाद कर दी जाये और यह भी, कि डोर सुलझायी जाये। पतंग उड़ायी भी पतंगबाज ने और डोर उलझायी भी पतंगबाज ने। इसमें पतंग का क्या दोष है? अब डोर सुलझाने के झंझट में ना ...