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Showing posts from March, 2026

रा. इ. का. खरोड़ा में मेधावी छात्रों को किया पुरस्कृत

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देहरादून, 31 मार्च 2026। देहरादून जिले के दूरस्थ विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज खरोड़ा में परीक्षा परिणाम उत्सव का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत कक्षा 6 से 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम वितरित किया गया। इसके साथ ही हर कक्षा में पहला स्थान प्राप्त बच्चों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कक्षा 6 में कुलदीप, कक्षा 7 में कृष, कक्षा 8 में अमित, कक्षा 9 में राजेंद्र और कक्षा 11में रोहन डिमरी ने अपनी - अपनी कक्षाओं में पहला स्थान हासिल किया। विद्यालय में पहला स्थान कक्षा 7 के कृष और दूसरा स्थान कक्षा 6 के कुलदीप के द्वारा प्राप्त करने पर उन्हें प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंस्पायर अवार्ड के लिए आइडिया चयन होने पर कक्षा 10 की आयुषी और कक्षा 9 के राजेंद्र को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. उमेश चमोला ने कहा कि विद्यालय बच्चों के लिए बहु आयामी विकास के केंद्र होते हैं। इसलिए आकलन में बच्चों के द्वारा प्राप्त अंकों के अलावा बच्चों के व्यक्तित्व के अन्य पक्ष जैसे संप्रेषण कौशल, सहयोग की भावना, परिश्रम की प्रवृत्ति आदि पर भी ध्यान दिया जाता...

रा. इ. का. खरोड़ा में मेधावी छात्रों को किया पुरस्कृत

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देहरादून, 31 मार्च 2026। देहरादून जिले के दूरस्थ विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज खरोड़ा में परीक्षा परिणाम उत्सव का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत कक्षा 6 से 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम वितरित किया गया। इसके साथ ही हर कक्षा में पहला स्थान प्राप्त बच्चों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कक्षा 6 में कुलदीप, कक्षा 7 में कृष, कक्षा 8 में अमित, कक्षा 9 में राजेंद्र और कक्षा 11में रोहन डिमरी ने अपनी - अपनी कक्षाओं में पहला स्थान हासिल किया। विद्यालय में पहला स्थान कक्षा 7 के कृष और दूसरा स्थान कक्षा 6 के कुलदीप के द्वारा प्राप्त करने पर उन्हें प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंस्पायर अवार्ड के लिए आइडिया चयन होने पर कक्षा 10 की आयुषी और कक्षा 9 के राजेंद्र को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. उमेश चमोला ने कहा कि विद्यालय बच्चों के लिए बहु आयामी विकास के केंद्र होते हैं। इसलिए आकलन में बच्चों के द्वारा प्राप्त अंकों के अलावा बच्चों के व्यक्तित्व के अन्य पक्ष जैसे संप्रेषण कौशल, सहयोग की भावना, परिश्रम की प्रवृत्ति आदि पर भी ध्यान दिया जाता...

उत्तराखंड में कौशलम् पाठ्यक्रम: सत्र 2025–26 में व्यावसायिक शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

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उत्तराखंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में संचालित कौशलम् कार्यक्रम आज शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है। शैक्षिक सत्र 2025–26 में इस कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विविध गतिविधियों, प्रशिक्षणों और शैक्षिक भ्रमणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युवा राज्य अब केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य कौशलम् कार्यक्रम का मूल उद्देश्य शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ते हुए उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि “करके सीखने” (Learning by Doing) की पद्धति पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार उन्हें विभिन्न कौशलों से जोड़ता है। इससे न केवल उनकी प्रतिभा का विकास होता है, बल्कि वे अपने भविष्य में जीवि...

उत्तराखंड में कौशलम् पाठ्यक्रम: सत्र 2025–26 में व्यावसायिक शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

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उत्तराखंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में संचालित कौशलम् कार्यक्रम आज शिक्षा के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है। शैक्षिक सत्र 2025–26 में इस कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विविध गतिविधियों, प्रशिक्षणों और शैक्षिक भ्रमणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युवा राज्य अब केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य कौशलम् कार्यक्रम का मूल उद्देश्य शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ते हुए उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि “करके सीखने” (Learning by Doing) की पद्धति पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार उन्हें विभिन्न कौशलों से जोड़ता है। इससे न केवल उनकी प्रतिभा का विकास होता है, बल्कि वे अपने भविष्य में जीवि...

बच्चों ने कार्यशाला में सीखे अवलोकन,चिंतन और वैज्ञानिक लेखन के गुर

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राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़, देहरादून में आज “प्रकृति लेखन के माध्यम से विज्ञान संप्रेषण” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन Altitudinal Academia for Science with Holistic Vision of Innovation (AASHVI) द्वारा किया गया, जिसे उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) का सहयोग प्राप्त हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सूक्ष्म अवलोकन क्षमता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति का विकास करना था। कार्यक्रम का नेतृत्व AASHVI फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती अंजलि शंकर ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास के वातावरण का गहन अवलोकन करने तथा उसे सरल एवं व्यवस्थित तरीके से लिखने की कला सिखाई। इसके पश्चात डॉ० अदिति चौहान, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज (DIBNS) ने संज्ञानात्मक कौशल पर आधारित एक रोचक एवं गतिविधि-आधारित सत्र संचालित किया। उन्होंने खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने और स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने के तरीके बताये। कार...

बच्चों ने कार्यशाला में सीखे अवलोकन,चिंतन और वैज्ञानिक लेखन के गुर

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राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामगढ़, देहरादून में आज “प्रकृति लेखन के माध्यम से विज्ञान संप्रेषण” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन Altitudinal Academia for Science with Holistic Vision of Innovation (AASHVI) द्वारा किया गया, जिसे उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) का सहयोग प्राप्त हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सूक्ष्म अवलोकन क्षमता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति का विकास करना था। कार्यक्रम का नेतृत्व AASHVI फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती अंजलि शंकर ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास के वातावरण का गहन अवलोकन करने तथा उसे सरल एवं व्यवस्थित तरीके से लिखने की कला सिखाई। इसके पश्चात डॉ० अदिति चौहान, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज (DIBNS) ने संज्ञानात्मक कौशल पर आधारित एक रोचक एवं गतिविधि-आधारित सत्र संचालित किया। उन्होंने खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने और स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने के तरीके बताये। कार...

गणित विषय के राज्य संदर्भ समूह की कार्यशाला का हुआ समापन

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देहरादून, 19 मार्च। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड द्वारा आयोजित State Resource Group Mathematics Training Workshop दिनांक 16 मार्च से 19 मार्च 2026 तक देहरादून स्थित SCERT के कॉन्फ्रेंस हॉल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। चार दिवसीय इस कार्यशाला में राज्य भर से आए गणित विषय के शिक्षकों एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नवीन शिक्षण पद्धतियों, अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) तथा 21वीं सदी के कौशलों से सुसज्जित करना था। कार्यशाला का शुभारंभ 16 मार्च को हुआ। उद्घाटन सत्र में श्रीमती वंदना गर्व्याल (निदेशक, ART ), श्री पदमेंद्र सकलानी (अपर निदेशक, SCERT) तथा डॉ. के.एन. बिजल्वाण (सहायक निदेशक, SCERT) की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों में डॉ. मनोज कुमार शुक्ला (प्रवक्ता, SCERT) द्वारा “NEP 2020 के अंतर्गत अनुभवात्मक अधिगम” विषय पर व्याख्यान दिया गया। इसके पश्चात डॉ. अंजुलि सुहाने (एसोसिएट प्रोफेसर, IGNOU, नई दिल्ली) ने “गणित के अनुशासन की ...

गणित विषय के राज्य संदर्भ समूह की कार्यशाला का हुआ समापन

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देहरादून, 19 मार्च। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड द्वारा आयोजित State Resource Group Mathematics Training Workshop दिनांक 16 मार्च से 19 मार्च 2026 तक देहरादून स्थित SCERT के कॉन्फ्रेंस हॉल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। चार दिवसीय इस कार्यशाला में राज्य भर से आए गणित विषय के शिक्षकों एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नवीन शिक्षण पद्धतियों, अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) तथा 21वीं सदी के कौशलों से सुसज्जित करना था। कार्यशाला का शुभारंभ 16 मार्च को हुआ। उद्घाटन सत्र में श्रीमती वंदना गर्व्याल (निदेशक, ART ), श्री पदमेंद्र सकलानी (अपर निदेशक, SCERT) तथा डॉ. के.एन. बिजल्वाण (सहायक निदेशक, SCERT) की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों में डॉ. मनोज कुमार शुक्ला (प्रवक्ता, SCERT) द्वारा “NEP 2020 के अंतर्गत अनुभवात्मक अधिगम” विषय पर व्याख्यान दिया गया। इसके पश्चात डॉ. अंजुलि सुहाने (एसोसिएट प्रोफेसर, IGNOU, नई दिल्ली) ने “गणित के अनुशासन की ...