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व्यथा: शिक्षक हैं या बहुउद्देशीय कर्मचारी?सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई और गैर-शैक्षणिक कामों के बीच पिसता शिक्षक

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हर सुबह विद्यालय पहुँचते ही शिक्षक के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि आज बच्चों को न्यूटन के गति के नियम कैसे समझाने हैं, किसी कविता का भावार्थ कैसे स्पष्ट करना है या गणित के सवालों को आसान कैसे बनाना है। सवाल यह होता है कि आज कौन-सा पोर्टल खुला है, किसकी अंतिम तिथि नजदीक है, किसका डेटा अधूरा है और किस काम की सूचना अभी व्हाट्सऐप पर आई है! बच्चों की कक्षा की घंटियां तो बाद में बजती हैं, लेकिन शिक्षक के दिमाग में विभागीय आदेशों की घंटियाँ उससे पहले ही बजने लगती हैं। उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षक की भूमिका आजकल इतनी बहुआयामी हो गई है कि कभी-कभी लगता है, नियुक्ति के समय विभाग ने उन्हें पढ़ाने के लिए चुना था या हर विभागीय और गैर विभागीय काम के लिए बहुउद्देशीय कर्मी बनाने के लिए! कक्षा में विद्यार्थी, मोबाइल में पोर्टल और एप्स एक समय था जब शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान, पढ़ाने के तरीके, विद्यार्थियों के परिणाम और बच्चों के साथ उसके आत्मीय संबंधों से होती थी। आज इन सबके साथ एक नई योग्यता भी अनिवार्य-सी हो गई है—कितने पोर्टलों पर काम कर सकता है, कितने एप्स चला सक...

विज्ञान महोत्सव 2026: बाल वैज्ञानिकों ने दिखाई प्रतिभा, विज्ञान नाट्य में होशियार सिंह बुद्धुमल जैन इंटर कॉलेज रहा प्रथम

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हरबर्टपुर , देहरादून, 22 अक्टूबर। पी.एम. श्री राजकीय इंटर कॉलेज, हरबर्टपुर में विकासखंड विकासनगर का दो दिवसीय ब्लॉक स्तरीय विज्ञान महोत्सव 2026 उत्साह और उमंग के साथ आयोजित किया गया। महोत्सव में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने विज्ञान मॉडल, नवाचार और विज्ञान नाटकों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना विकसित करना रहा। सात उप-विषयों पर प्रस्तुत किए वैज्ञानिक मॉडल बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का मुख्य विषय ‘सतत एवं विकसित भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार’ रखा गया। प्रतियोगिता जूनियर और सीनियर वर्गों में आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने समसामयिक चुनौतियों के समाधान पर आधारित मॉडल और विचार प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी में बेहतर जीवन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा एवं पर्यावरण संरक्षण, गणितीय प्रतिरूपण एवं कंप्यूटेशनल चिंतन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, स्वदेशी कृषि पद्धति, ग्रामीण परिवर्तन के लिए विज्ञान तथा आपदा प्रबंधन जैसे सात उप-वि...

शिक्षकों - कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक ,जनगणना के कारण विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी अनुमति

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खटीमा (ऊधम सिंह नगर)। जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। खटीमा विकासखंड में जनगणना कार्यक्रम के प्रशिक्षण और संबंधित कार्यों के सफल संचालन को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों की छुट्टियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारी खटीमा भानु प्रताप ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों और संस्थाध्यक्षों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। जारी आदेश के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 से जनगणना कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रारंभ हो रहा है। जनगणना संबंधी कार्य अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह से नवंबर 2026 तक संचालित किए जाने प्रस्तावित हैं। इस दौरान संबंधित शिक्षकों और कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि जनगणना कार्य निर्धारित समय पर सुचारु रूप से संपन्न हो सके। सामान्य परिस्थितियों में नहीं मिलेगी छुट्टी खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कार्यक्रम के प्रशिक्षण एवं संबंधित कार्य पूर्ण ह...

अपनी जन्मभूमि में गढ़वाली काव्य-कृति ‘बौडिक ऐजा’ का विमाचन करवा कवि अम्बरीष चंद्र चमोली ने दिया घर वापसी का संदेश

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‘लौट के आ जाओ’ में झलकी पहाड़, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने की भावपूर्ण पुकार पलाम, टिहरी गढ़वाल, 22 अक्टूबर। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक सरोकारों और पलायन की पीड़ा को गढ़वाली भाषा में अभिव्यक्त करने वाली डॉ. अम्बरीष चंद्र चमोली की नवीन काव्य-कृति ‘बौडिक ऐजा’ का विमोचन उनकी जन्मभूमि ग्राम पलाम में श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर किया गया। बिनसर पब्लिकेशन, देहरादून से वर्ष 2026 में प्रकाशित इस कृति को लेखक ने अपनी मां और मातृभूमि को समर्पित किया है।  धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुए विमोचन समारोह ने साहित्य, संस्कृति और अपनी मिट्टी के प्रति आत्मीय लगाव का संदेश दिया। गढ़वाली में ‘बौडिक ऐजा’ का अर्थ ‘लौट के आ जाओ’ है। कृति का शीर्षक पहाड़ से दूर रह रहे लोगों को अपनी जन्मभूमि, मातृभाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का भावपूर्ण आह्वान करता है। पलायन के कारण खाली होते गांवों और बदलते ग्रामीण जीवन के बीच यह कृति पहाड़ के सामाजिक यथार्थ तथा अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ साहित्यिक ...

विजयादशमी विशेष : राम का पता नहीं, पर रावण अभी तक जिंदा है!

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                      --- प्रदीप बहुगुणा 'दर्पण' हर साल दशहरा आता है। मैदान में रावण का पुतला खड़ा किया जाता है। उसके दस सिरों पर बुराई के दस चेहरे चिपका दिए जाते हैं। फिर राम के हाथों अग्निबाण छूटता है, पटाखे फूटते हैं और रावण धू-धू कर जलने लगता है। तालियां बजती हैं, भीड़ खुश होती है और लोग घर लौट जाते हैं। अगले दिन अखबारों में रावण दहन की तस्वीरें छपती हैं। लेकिन एक सवाल है, जो हर साल राख के ढेर से उठकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—जब रावण हर साल जलाया जाता है, तो वह जिंदा कैसे बच जाता है? और राम आखिर हैं कहां? दरअसल, हमने रावण के पुतले को मैदान में खड़ा करना, प्रतीकात्मक रूप से उसे मारना और जलाना तो सीख लिया है, लेकिन अपने भीतर बैठे रावण को पहचानना नहीं सीखा। हम बुराई के पुतले जलाते हैं, मगर बुराइयों को पालते रहते हैं। रावण अमर नहीं है, बल्कि वास्तव में हम उसे मारने के लिए तैयार ही नहीं हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया से बुराई मिट जाए, लेकिन उसकी शुरुआत हमसे न हो। राम और रावण की कथा केवल त्रेतायुग की कहानी नही...

दो सौ से भी अधिक पुस्तकों के रचनाकार प्रो. नन्दकिशोर ढौंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान पर प्रकाशित होगा अभिनंदन ग्रंथ

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कोटद्वार, 19 अक्टूबर। हिंदी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान और दीर्घकालीन साहित्य सेवा को सम्मानित करने के लिए उनके नाम पर अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा। इस संबंध में गढ़वाली चौक, ध्रुवपुर में आयोजित बैठक में ‘हिंदी साहित्य के वट-वृक्ष प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ डी.लिट् अभिनंदन ग्रंथ समिति’ का गठन किया गया। समिति का उद्देश्य प्रो. ढोंडियाल के साहित्यिक अवदान को व्यापक स्तर पर सामने लाना तथा उनके रचनात्मक कार्यों का परिचय और मूल्यांकन पाठकों एवं साहित्य जगत तक पहुंचाना है। 201 से अधिक पुस्तकों का कर चुके हैं सृजन प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ अब तक 201 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक योगदान को देखते हुए साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने उनके सम्मान में अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित करने की पहल की है। बैठक में उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व का समुचित परिचय तथा मूल्यांकन अभी व्यापक स्तर पर सामने आना बाकी है। समिति में प्रकाश चन्द्र कोठारी और डॉ. मन...

राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना की प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

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देहरादून, 19 अक्तूबर।  जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून के तत्वावधान में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जनपद स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक विषयों के प्रति समझ का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं का आयोजन डायट के प्राचार्य गोविन्द राम जायसवाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत लोक नृत्य, रोल प्ले, समूह चर्चा और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी समझ, जीवन-कौशल, जिम्मेदार नागरिकता तथा समसामयिक सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही विभिन्न सामाजिक विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिला। प्रतियोगिताओं के परिणामों में रोल प्ले में राजकीय बालिका इंटर कॉले...