विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार बनेगी आनन्दम पाठ्यचर्या : वन्दना गर्ब्याल
डायट देहरादून में 80 शिक्षक-शिक्षिकाओं को दिया गया प्रशिक्षण, विद्यालयों में प्रथम वादन में होगा संचालन
देहरादून। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून में आनन्दम पाठ्यचर्या के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया गया। 3 एवं 4 नवंबर तथा 5 एवं 6 नवंबर 2026 को आयोजित इस प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न विद्यालयों से 80 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।
डायट प्राचार्य श्रीमती मंजू भारती के दिशानिर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को आनन्दम पाठ्यचर्या की अवधारणा, उद्देश्यों एवं शिक्षण विधियों से परिचित कराना तथा विद्यालयों में इसके प्रभावी संचालन के लिए दक्ष बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान निदेशक, अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण श्रीमती वन्दना गबर्याल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की अकादमिक उपलब्धियां बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार एवं मानवीय मूल्यों से युक्त नागरिक बनाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास, आत्मानुशासन, सहयोग, सहानुभूति एवं सकारात्मक सोच के विकास पर जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि विद्यालयों में आनन्दम पाठ्यचर्या का संचालन अनिवार्य रूप से प्रथम वादन में किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के दिन की शुरुआत सकारात्मक एवं आनंदपूर्ण वातावरण में हो।
प्राचार्य श्रीमती मंजू भारती ने कहा कि आनन्दम पाठ्यचर्या विद्यार्थियों को स्वयं को समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने तथा दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान एवं कौशल को विद्यालयों में व्यवहार में लाने और पाठ्यचर्या का नियमित संचालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की।
कार्यक्रम समन्वयक एवं डायट प्रवक्ता डॉ. विजय सिंह रावत ने आनन्दम पाठ्यचर्या की अवधारणा एवं आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, आत्मानुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता एवं जीवन कौशल विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आनन्दम पाठ्यचर्या को केवल एक निर्धारित वादन तक सीमित न रखकर इसके मूल्यों को विद्यालय के समग्र वातावरण और दैनिक शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
प्रशिक्षण में लभ्या फाउंडेशन के श्री अमर चिखले, लवलीन, आरजू एवं श्री मनीष तथा ड्रीम ए ड्रीम संस्था की श्रीमती पूनम जुयाल एवं श्री इकराम ने संदर्भदाता के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण को गतिविधि आधारित एवं अनुभवात्मक बनाते हुए आनन्दम पाठ्यचर्या के चार प्रमुख शिक्षण-शास्त्रों—ध्यान (माइंडफुलनेस), कहानी, गतिविधि एवं अभिव्यक्ति पर विशेष फोकस किया गया।
संदर्भदाताओं ने विभिन्न अभ्यासों एवं गतिविधियों के माध्यम से बताया कि ध्यान से विद्यार्थियों में एकाग्रता एवं आत्म-जागरूकता, कहानियों से मानवीय मूल्यों एवं सहानुभूति, सामूहिक गतिविधियों से सहयोग एवं सहभागिता तथा अभिव्यक्ति से विचारों एवं भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
प्रशिक्षण सत्रों में शिक्षकों ने समूह चर्चा, कहानी-कथन, ध्यान अभ्यास एवं विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की। इस दौरान कक्षा में सुरक्षित, सहज एवं सहयोगपूर्ण वातावरण बनाने तथा प्रत्येक विद्यार्थी की भावनाओं एवं विचारों को सम्मान देने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में डायट प्रवक्ता श्री प्रणय बहुगुणा एवं श्री शिशुपाल बिष्ट ने विशेष सहयोग प्रदान किया। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने आनन्दम पाठ्यचर्या को विद्यालयों में प्रभावी एवं नियमित रूप से संचालित करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. विजय सिंह रावत ने बताया कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों की सामाजिक-भावनात्मक अधिगम एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षण प्रक्रिया के प्रति समझ और व्यावहारिक दक्षता में वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसके माध्यम से विद्यालयों में आनंदपूर्ण, संवेदनशील एवं सकारात्मक शिक्षण वातावरण विकसित करने में सहायता मिलेगी।
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