अपनी जन्मभूमि में गढ़वाली काव्य-कृति ‘बौडिक ऐजा’ का विमाचन करवा कवि अम्बरीष चंद्र चमोली ने दिया घर वापसी का संदेश
‘लौट के आ जाओ’ में झलकी पहाड़, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने की भावपूर्ण पुकार पलाम, टिहरी गढ़वाल, 22 अक्टूबर। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक सरोकारों और पलायन की पीड़ा को गढ़वाली भाषा में अभिव्यक्त करने वाली डॉ. अम्बरीष चंद्र चमोली की नवीन काव्य-कृति ‘बौडिक ऐजा’ का विमोचन उनकी जन्मभूमि ग्राम पलाम में श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर किया गया। बिनसर पब्लिकेशन, देहरादून से वर्ष 2026 में प्रकाशित इस कृति को लेखक ने अपनी मां और मातृभूमि को समर्पित किया है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुए विमोचन समारोह ने साहित्य, संस्कृति और अपनी मिट्टी के प्रति आत्मीय लगाव का संदेश दिया। गढ़वाली में ‘बौडिक ऐजा’ का अर्थ ‘लौट के आ जाओ’ है। कृति का शीर्षक पहाड़ से दूर रह रहे लोगों को अपनी जन्मभूमि, मातृभाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने का भावपूर्ण आह्वान करता है। पलायन के कारण खाली होते गांवों और बदलते ग्रामीण जीवन के बीच यह कृति पहाड़ के सामाजिक यथार्थ तथा अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ साहित्यिक ...