जन्म-मृत्यु पंजीकरण में बड़ा बदलाव, एक अक्टूबर से लागू हुआ संशोधित प्रावधान
देहरादून, 7 अक्टूबर। जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण संशोधन के बाद अब उत्तराखंड में भी इसके प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, उत्तराखंड की ओर से सभी मुख्य चिकित्साधिकारी एवं अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को जारी पत्र में संशोधित नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ये प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं।
पत्र के अनुसार भारत सरकार के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली ने 22 सितंबर 2026 को संशोधित प्रावधानों के संबंध में राज्यों को जानकारी भेजी थी। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में बदलाव किया गया है। संशोधित अधिनियम 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था।
दो वर्ष से अधिक विलंब पर अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी, एक से दो वर्ष के बीच जिला स्तर पर होगा पंजीकरण
संशोधन के बाद विलंब से जन्म अथवा मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। अब घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने की स्थिति में संबंधित रजिस्ट्रार को जिला रजिस्ट्रार अथवा संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी/जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत अधिकारी के आदेश के आधार पर ही पंजीकरण करना होगा।
वहीं, जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष बाद दिए जाने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate of the First Class) के आदेश के आधार पर ही किया जाएगा। इससे लंबे समय से लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण मामलों में अब न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।
महानिदेशक/अपर मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संशोधित प्रावधानों को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को नए नियमों के अनुरूप आमजन के लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण मामलों का निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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