शिक्षक केवल अपना विषय ही नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ते हैं: जायसवाल
देहरादून, 6 अक्टूबर। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जनपद देहरादून के भौतिक विज्ञान, भूगोल और अंग्रेजी विषय के प्रवक्ताओं के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का रविवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून में शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण में तीनों विषयों के करीब 80 प्रवक्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों की विषयगत एवं शैक्षिक दक्षताओं को बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संस्तुतियों को प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डायट के प्राचार्य गोविंद राम जायसवाल ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार शिक्षक की सक्रिय और प्रभावी भूमिका के बिना संभव नहीं है। शिक्षक केवल विषय-वस्तु का संप्रेषण करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, जीवन कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने वाला मार्गदर्शक है।
उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण को महज औपचारिक गतिविधि न मानकर इसे अपने व्यावसायिक विकास का माध्यम बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनपद देहरादून को शैक्षिक गुणवत्ता एवं उपलब्धियों के क्षेत्र में राज्य में अग्रणी स्थान दिलाने के लिए सभी शिक्षकों को टीम भावना के साथ निरंतर प्रयास करने होंगे। विद्यालयों में नवाचार, विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी उन्होंने जोर दिया।
प्रशिक्षण के अगले सत्र में संदर्भदाता डॉ. विजय सिंह रावत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने 5+3+3+4 शैक्षिक संरचना, दक्षता आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण, बहुविषयक दृष्टिकोण, बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान तथा व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पाठ्यचर्या का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक पूरी करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आवश्यक दक्षताओं, कौशल, मूल्यों और दृष्टिकोणों का विकास करना है। उन्होंने स्थानीय संसाधनों, परियोजना कार्य, गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभवों को शिक्षण से जोड़ने पर भी जोर दिया।
मध्याह्न भोजन के बाद हुए सत्र में सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय विकास योजना, जनसंपर्क और हितधारकों की भूमिका पर चर्चा हुई। डॉ. रावत ने कहा कि विद्यालय की गुणवत्ता सुधार में अभिभावकों, समुदाय, विद्यालय प्रबंधन समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पूर्व छात्रों की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में समन्वयक श्रीमती प्रियंका तोमर ने शिक्षक आचरण संहिता की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों के व्यावसायिक दायित्व, अनुशासन, नैतिक मूल्यों, निष्पक्षता और संवेदनशीलता को शिक्षक की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सभी सत्रों में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रशिक्षण से शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ विद्यालय विकास, सामुदायिक सहभागिता और प्रभावी शिक्षण की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला।
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