दो सौ से भी अधिक पुस्तकों के रचनाकार प्रो. नन्दकिशोर ढौंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान पर प्रकाशित होगा अभिनंदन ग्रंथ
कोटद्वार, 19 अक्टूबर। हिंदी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ के साहित्यिक योगदान और दीर्घकालीन साहित्य सेवा को सम्मानित करने के लिए उनके नाम पर अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित किया जाएगा। इस संबंध में गढ़वाली चौक, ध्रुवपुर में आयोजित बैठक में ‘हिंदी साहित्य के वट-वृक्ष प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ डी.लिट् अभिनंदन ग्रंथ समिति’ का गठन किया गया। समिति का उद्देश्य प्रो. ढोंडियाल के साहित्यिक अवदान को व्यापक स्तर पर सामने लाना तथा उनके रचनात्मक कार्यों का परिचय और मूल्यांकन पाठकों एवं साहित्य जगत तक पहुंचाना है।
201 से अधिक पुस्तकों का कर चुके हैं सृजन
प्रो. नन्दकिशोर ढोंडियाल ‘अरुण’ अब तक 201 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक योगदान को देखते हुए साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने उनके सम्मान में अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित करने की पहल की है। बैठक में उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और कृतित्व का समुचित परिचय तथा मूल्यांकन अभी व्यापक स्तर पर सामने आना बाकी है।
समिति में प्रकाश चन्द्र कोठारी और डॉ. मनोरमा ढोंडियाल को संरक्षक, चंद्रप्रकाश नैथानी को निदेशक तथा डॉ. अशोक गिरी को प्रधान संपादक चुना गया। संपादक मंडल में डॉ. ललन कुमार बुडाकोटी, डॉ. बीना वशिष्ठ और श्रीमती संपति नेगी ‘संध्या’ विद्यावाचस्पति को शामिल किया गया है। डॉ. सुरेन्द्र लाल आर्य ‘सर्वोदयी भूषण’ को कार्यकारी संपादक, मंजुल किशोर ढोंडियाल को प्रबंध संपादक, श्रीमती दीपशिखा ढोंडियाल को समन्वयिका और मोहित रावत को निरीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से किया गया।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक प्रकाश चन्द्र कोठारी ने कहा कि वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. ढोंडियाल ने विपुल साहित्य का सृजन किया है, लेकिन उनके साहित्य का जैसा परिचय और मूल्यांकन होना चाहिए था, वह अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने अभिनंदन ग्रंथ को उनके साहित्यिक योगदान को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
साहित्यांचल के अध्यक्ष एवं समिति के निदेशक चंद्रप्रकाश नैथानी ने कहा कि प्रो. ढोंडियाल की पुस्तक ‘गढ़वाल की दिवंगत विभूतियां’ ने ऐसी अनेक विभूतियों को पहचान दिलाने का काम किया है, जो अब तक गुमनामी के अंधेरे में थीं।
बैठक में डॉ. सुरेन्द्र लाल आर्य, डॉ. ललन कुमार बुडाकोटी, डॉ. मनोरमा ढोंडियाल, मंजुल किशोर ढोंडियाल और मोहित रावत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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