राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना की प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा


देहरादून, 19 अक्तूबर। 
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), देहरादून के तत्वावधान में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एनपीईपी) वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जनपद स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक विषयों के प्रति समझ का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं का आयोजन डायट के प्राचार्य गोविन्द राम जायसवाल के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत लोक नृत्य, रोल प्ले, समूह चर्चा और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य संबंधी समझ, जीवन-कौशल, जिम्मेदार नागरिकता तथा समसामयिक सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही विभिन्न सामाजिक विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिला।

प्रतियोगिताओं के परिणामों में रोल प्ले में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज लक्खीबाग ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लोक नृत्य प्रतियोगिता में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कोटी कनासर के प्रतिभागियों ने बाजी मारी। पोस्टर प्रतियोगिता में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, नकरौंदा ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि समूह चर्चा में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कौलागढ़ प्रथम रहा।

प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए राजेश गैरोला, अनिल डोभाल और ऋतु कुकरेती निर्णायक मंडल में शामिल रहे। निर्णायकों ने विद्यार्थियों की विषय-वस्तु, प्रस्तुतीकरण, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता, टीमवर्क और विषय की समझ के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम के आयोजन में कार्यक्रम समन्वयक प्रणय बहुगुणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, कार्यक्रम के संचालन एवं आयोजन में डॉ. विजय रावत और सुरेंद्र डगवाल का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर विजेता प्रतिभागियों और संबंधित विद्यालयों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना के अंतर्गत आयोजित ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच, संवाद कौशल, सहयोग की भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुण विकसित होते हैं। साथ ही, वे सामाजिक चुनौतियों को समझने और उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।

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