हिंदी दिवस पर विशेष कविता : भारत के माथे की बिंदी
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| फोटो -साभार (इंटरनेट) |
जिससे अपनी संस्कृति ज़िंदी, हिंदी है वो सबकी हिंदी॥
भारत के माथे की बिंदी...
हिंदी से विज्ञान बना है, हिंदी में इतिहास पला है।
इसकी पावन ऊर्जा से ही संस्कृति का विहान चला है।।
तबलों की थापें हैं, इसमें वीणा के स्वर इसमें समाये ।
सामगान और वेद ऋचायेँ , हिंदी में ही समझी जायेँ ॥
ज्ञान और विज्ञान की कुंजी, हिंदी है हम सबकी हिंदी ।
भारत के माथे की बिंदी...
बंगाली हो या गुजराती , हिंदी हम सबकी भाषा है।
पंजाबी हो या मदरासी, हिंदी अब सबकी आशा है॥
उत्तर- दक्षिण, पूरब- पश्चिम, एका की ये परिचायक है।
एक सूत्र में बांधे सबको, भारत की उन्नायक है॥
कहे मराठी और कहे सिंधी , हिंदी है हम सबकी हिंदी।
भारत के माथे की बिंदी...
मैकाले के पुत्रों को ये बात समझ में क्यों न आती।
अपने हिंदुस्तान में हिंदी, खून के आँसू क्यों बहाती॥
लानत भेजूँ उन पर मैं जो, हिंदी बोलने में शरमाते।
व्यर्थ हैं वो विद्यालय जिनमें, हिंदी भाषी पीटे जाते॥
उड़ा दो उनकी चिंदी-चिंदी, हिंदी है हम सबकी हिंदी ।
भारत के माथे की बिंदी...
........ प्रदीप बहुगुणा 'दर्पण '

बहुत सुन्दर भ्राताश्री
ReplyDeleteबहुत सुन्दर दर्पण जी 👌👌👌
Deleteबहुत खूब सर.
Deleteधन्यवाद।।
ReplyDeleteमैकाले के पुत्रों को ये बात समझ में क्यों न आती।
ReplyDeleteअपने हिंदुस्तान में हिंदी, खून के आँसू क्यों बहाती॥
लानत भेजूँ उन पर मैं जो, हिंदी बोलने में शरमाते।
व्यर्थ हैं वो विद्यालय जिनमें, हिंदी भाषी पीटे जाते॥
बहुत सही
कमबख्त कुछ लोग समझते ही नहीं, खाते हिंदी की है और बातें अंग्रेजी में करते हैं, बहुत दोगलापन है
समर्थन के लिए आभार।
ReplyDeleteATI Sundar Pradeep bhai
ReplyDeleteबहुत अच्छी रचना है बहुगुणा जी। एक कवि की कलम में ही दम है जो पूरे समाज को बदलने का दम रखता है। आप फिजिक्स के प्रवक्ता होते हुए भी हिंदी भाषा पर एक मजबूत पकड़ रखते हैं जो कि हिंदी भाषा के प्रति आपके प्रेम को दर्शाता है।
ReplyDeleteहार्दिक आभार।
Deleteबहुत सुन्दर रचना, बधाई है !
ReplyDeleteआप सभी का हार्दिक आभार।
ReplyDeleteअति सुंदर सर🙏🙏
ReplyDeleteअति सुंदर सर🙏🙏
ReplyDeleteअतीव सुंदरम
ReplyDeleteहिंदी दिवस की शुभकामनाएं
धन्यवाद।
ReplyDeleteअति उत्तम भ्रातश्री
ReplyDeleteधन्यवाद।
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