ऑक्सफोर्ड में गूंजा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, Social Outcomes Conference में डॉ. भगवती प्रसाद मैंदोली ने रखा उत्तराखंड के शिक्षा परिवर्तन का मॉडल,
ऑक्सफोर्ड, 4 सितंबर 2026। उत्तराखंड की आनंदम पाठचर्या (Happiness Curriculum–Anandam Pathacharya) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। 3 और 4 सितंबर 2026 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित Social Outcomes Conference में उत्तराखंड के शिक्षा परिवर्तन मॉडल और आनंदम पाठचर्या के अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन के विशेष सत्र “What Does Education System Transformation Look Like from Inside Government?” में समग्र शिक्षा, उत्तराखंड के स्टाफ ऑफिसर डॉ. भगवती प्रसाद मैंदोली ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम और आनंदम पाठचर्या के अनुभव साझा किए।
संस्कृत मंगलाचरण और माइंडफुलनेस से हुई शुरुआत
सत्र की शुरुआत भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेष झलक के साथ हुई। डॉ. मैंदोली ने अपने संबोधन का प्रारंभ संस्कृत मंगलाचरण से किया। इसके बाद उन्होंने उपस्थित अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को लगभग दो मिनट का माइंडफुलनेस एवं ध्यान अभ्यास कराया।
प्रतिभागियों ने कुछ समय शांत होकर अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्कृत मंत्र और ध्यान के इस प्रयोग ने शिक्षा में मानसिक शांति, भावनात्मक कल्याण और बच्चों के समग्र विकास की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।
‘नीति से कक्षा तक पहुंचना ही वास्तविक शिक्षा परिवर्तन’
डॉ. मैंदोली ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन केवल नई नीतियां बनाने या योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने तक सीमित नहीं है। वास्तविक परिवर्तन तब होता है, जब नीति कागजों से निकलकर विद्यालय और कक्षा तक पहुंचती है और शिक्षक उसे बच्चों के जीवन में सार्थक बदलाव में परिवर्तित करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, संवेदनशील, सहानुभूतिशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के साथ आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, मूल्यबोध और कल्याण को भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने Social and Emotional Learning (SEL) को बच्चों के समग्र विकास और शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
2019 में शुरू हुई थी आनंदम पाठचर्या
डॉ. मैंदोली ने उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई आनंदम पाठचर्या के उद्देश्य और क्रियान्वयन की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आनंदम का उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा सकारात्मक वातावरण विकसित करना है, जहां बच्चे केवल विषयगत ज्ञान ही न प्राप्त करें, बल्कि स्वयं को और दूसरों को समझना, सहानुभूति विकसित करना तथा अपनी भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना भी सीखें।
आनंदम के अंतर्गत विद्यालयों में प्रतिदिन शुरुआती 30–35 मिनट बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास के लिए निर्धारित किए जाते हैं। इसकी शुरुआत माइंडफुलनेस से होती है। इसके बाद कहानी और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न सामाजिक एवं भावनात्मक परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया जाता है। अंत में अभिव्यक्ति (Expression) के माध्यम से बच्चे अपने विचारों और भावनाओं को साझा करते हैं।
16 हजार विद्यालयों तक पहुंचा आनंदम
डॉ. मैंदोली ने अपने शोधकार्य तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड (SCERT Uttarakhand) के अध्ययनों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि आनंदम पाठचर्या के माध्यम से बच्चों की एकाग्रता, सहानुभूति और संबंध निर्माण में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इसके साथ ही शिक्षकों के कक्षा प्रबंधन में भी सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में आनंदम पाठचर्या लगभग 16,000 विद्यालयों, 30,000 शिक्षकों और करीब 2 लाख विद्यार्थियों तक पहुंच चुकी है। राज्य के PM SHRI विद्यालयों में भी सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम तथा शिक्षक क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने सराहा, दिखाई विशेष रुचि
डॉ. मैंदोली की प्रस्तुति के बाद विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड की आनंदम पाठचर्या, माइंडफुलनेस तथा सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम के समावेश में विशेष रुचि दिखाई। प्रतिनिधियों ने शिक्षा में बच्चों के भावनात्मक कल्याण और समग्र विकास को शामिल करने के उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. मैंदोली ने कहा कि उत्तराखंड का अनुभव यह दर्शाता है कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा दृष्टिकोण को साथ लेकर बच्चों के समग्र विकास, भावनात्मक कल्याण और सकारात्मक सीखने के वातावरण को मजबूत किया जा सकता है।
‘आनंदम’ की सफलता का श्रेय शिक्षकों और सरकार को
डॉ. मैंदोली ने आनंदम की सफलता का श्रेय किसी एक व्यक्ति या संस्था को देने के बजाय राज्य सरकार के निरंतर सहयोग, मजबूत नीति-संकल्प और शिक्षकों की प्रतिबद्धता को दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी नीति की वास्तविक सफलता तभी होती है, जब वह कागजों से निकलकर कक्षा तक पहुंचे और अंतिम बच्चे के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उत्तराखंड के शिक्षकों ने आनंदम को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और खुशहाल जीवन से जोड़कर अपनाया है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड की आनंदम पाठचर्या के अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करने के लिए Dream a Dream तथा सभी साझेदार संगठनों का आभार व्यक्त किया। साथ ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय को उत्तराखंड के शिक्षा परिवर्तन के अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया।
‘ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के सामूहिक उच्चारण से हुआ समापन
सत्र का समापन भारतीय परंपरा के सार्वभौमिक कल्याण संदेश “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। इसके बाद “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” के उच्चारण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्कृत मंत्र, ध्यान और उत्तराखंड की आनंदम पाठचर्या की प्रस्तुति ने शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को रेखांकित किया। संदेश स्पष्ट था कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास, सामाजिक-भावनात्मक क्षमता, मानसिक शांति और कल्याण को सुनिश्चित करना भी है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. भगवती प्रसाद मैंदोली ने शिक्षा के उद्देश्य को एक महत्वपूर्ण सवाल के माध्यम से सामने रखा—शिक्षा का अंतिम प्रश्न केवल “मैं क्या प्राप्त कर सकता हूं?” नहीं, बल्कि “मैं किस प्रकार योगदान दे सकता हूं?” भी होना चाहिए।
उनके अनुसार, यही सोच शिक्षा को जीवन से जोड़ती है और बेहतर, संवेदनशील एवं खुशहाल समाज के निर्माण की दिशा में आगे ले जाती है।
डॉक्टर मैंदोली की इस उपलब्धि पर विद्यालयी शिक्षा विभाग उत्तराखंड ,समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षक संघ के पदाधिकारियों और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे विभिन्न गैर सरकारी संगठनों ने हर्ष जताया है।
Good going sir. Very proud of you.
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