कलम मेरी खामोश नहीं , ये लिखती नई कहानी है। इसमें स्याही के बदले मेरी , आंखों वाला पानी है।। सृजन की सरिता इससे बहती झूठ नहीं ये सच है कहती। जीवन के हर सुख-दुख में ये , कलम सदा संग मेरे रहती॥ ये मेरी सहचरी , मेरी सहेली , मेरे दिल की रानी है। इसमें स्याही के बदले मेरी , आंखों वाला पानी है।। इसने जीना मुझे सिखाया , सच से परिचय मेरा कराया। जीवन की सच्चाई लिखाकर , मुझे कवि इसने ही बनाया।। मेरे आपके अनुभवों की , ये तस्वीर नूरानी है। इसमें स्याही के बदले मेरी , आंखों वाला पानी है।। कलम कवि का है हथियार , इसका है सब पर अधिकार। जीवन के इस महासागर में , कलम बनी मेरी पतवार।। अटल इरादों वाली है ये , इसकी चाल तूफानी है। इसमें स्याही के बदले मेरी , आंखों वाला पानी है।। कलम का सौदा कर न सकूँगा , मैं खुद से धोखा कर न सकूँगा। इसके सहारे जीता हूँ मैं , इससे धोखा कर न सकूंगा॥ ये मेरी पहचान है , मेरे गौरव की ये निशा...
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