Har ghar me tiranga laharaye| हर घर में तिरंगा लहराए : लक्ष्मी बिष्ट की कविता

tirange par kavita

हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाए।
अपना भारत प्राणों से प्यारा,
हर लब यह गीत गुनगुनाए।

तीन रंगों की छटा निराली
धरती से गगन तक छा जाए।
तिरंगे की विराटता में,
सारा जग समा जाए।
उस दिव्य भाव को छू लें,
जो देश प्रेम की राह दिखाए।
हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाए।

रंग केसरिया याद दिलाता,
शौर्य- बलिदान का गाथाएँ।
सांसों की गति रुक भी जाये,
पर प्रगति राष्ट्र की न रुकने पाये।
हमारी आन- बान, स्वाभिमान तिरंगा
कभी न झुकने पाये।
देश की खातिर वीरों की
कुर्बानियां न व्यर्थ जाएं।
हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाए।

श्वेत रंग पैगाम शांति का लाये,
सत्य का पथ हो,शुद्ध हृदय हो,
स्नेह नीर से दूषित मन के मैल हटाएं।
आपस के मतभेद भुलाकर,
सबको प्रेम से गले लगाएँ।
हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाए।

मध्य अशोक चक्र गतिमान,
अनवरत जीवन की गति बताएं।
चलते रहो, कभी न रुको
यही संदेश सुनाए।
हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाये।

हरा रंग जीवन में
सुख समृद्धि बढ़ाये।
मेरे वतन में खुशहाली हो,
खेतों में हरियाली हो,
कोई भूखा न सोने पाये।
हर घर में तिरंगा लहराए,
हर दिल में तिरंगा बस जाए।

आओ देशप्रेम के इन तीन
रंगों में हम सब रंग जाएं।

....... लक्ष्मी बिष्ट गड़िया,

जिला समन्वयक, समग्र शिक्षा देहरादून,उत्तराखंड

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